अक्स (Aks)

अक्स बन जब से मेरा तुम आये हो
आइनों  से मेरी मुलाकातें कम होती हैं

बयान कर रही है, मेरी हकीकत ज़बान-ए-जहाँ
अपने दस्तखतों की वारदातें अब कम होती हैं
वजूद  मेरा अब हकीकत रहा कहाँ
खुद से मेरी गहराई अब कम होती है
तुम्हारी रूह में कोने तलाश रहा हूँ
रहने को अब जिस्म में जगह कम होती है

सोचता हूँ, ए अक्स मेरे लूँ  तुझी में पनाह
राहत को अब दिल की यह बातें …कम होती हैं

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